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नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बदलेगा भारत का लोकतांत्रिक चेहरा -पूर्णिमा साहू  

4/12/2026 4:09:59 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Jamshedpur  :जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने आज  जमशेदपुर परिषदन  में आयोजित प्रेस वार्ता में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक और युगांतरकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम आरक्षण के प्रावधान के साथ महिलाओं को 'नीति की लाभार्थी' से 'नीति निर्माता' बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की सीटें भी शामिल हैं। विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण सिर्फ़ प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है। यह तय करता है कि देश किस प्रकार का समाज बनाना चाहता है। जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो समाज के हर वर्ग को लाभ मिलता है। वैश्विक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है, आय में समानता आती है और समावेशी विकास को गति मिलती है। यदि लैंगिक अंतर कम किया जाए, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि संभव है। पिछले एक दशक में महिलाओं की स्थिति में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया  कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 72% घर महिलाओं के नाम, एसटीईएम STEM क्षेत्र में 43% महिलाएं, मुद्रा योजना के 69% ऋण महिलाओं को, स्टैंड-अप इंडिया के 84% लाभार्थी महिलाएं शामिल हैं। 
 पूर्णिमा साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई गई कई प्रभावी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है। उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ गैस कनेक्शन जल जीवन मिशन के जरिए 14.45 करोड़ घरों तक पानी, स्वच्छ भारत मिशन से खुले में शौच से मुक्ति, महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र, मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह एवं मातृ मृत्यु दर में कमी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार भी इन प्रयासों का परिणाम है।वही  विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि आज महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान कर रही हैं। 2024 तक कुल मतदाताओं में 48.62% महिलाएं हैं और 65.78% महिलाओं ने मतदान किया, जो कई जगह पुरुषों से अधिक है। इसके बावजूद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या अभी भी सीमित है। 1952 में लोकसभा में 22 महिलाएं थीं, जो 2024 में बढ़कर 75 हो गई हैं, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा लगभग 17% है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में 46% महिला प्रतिनिधित्व और लगभग 14.5 लाख महिला जनप्रतिनिधियों ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं अवसर मिलने पर बेहतर शासन दे सकती हैं। गांवों में पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ-सफाई और पोषण जैसे क्षेत्रों में हुए सुधार इसका उदाहरण हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ती भागीदारी के बावजूद प्रतिनिधित्व अपने आप नहीं बढ़ता, इसलिए नीति के माध्यम से संतुलन जरूरी है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण, एससी /एसटी सीटों में भी महिला आरक्षण और नीति निर्माण में महिलाओं की सीधी भागीदारी होगी। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में 32 करोड़ महिलाओं के जन धन योजना के तहत बैंक खाते खुले, 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं, लड़कियों की शिक्षा और पीएचडी में भागीदारी बढ़ी, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और पोषण 2.0 जैसे कार्यक्रमों से करोड़ों महिलाओं को लाभ मिला है। विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि महिला नेतृत्व से शासन की प्राथमिकताएं बदलती हैं। पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर अधिक ध्यान दिया जाता है और जवाबदेही मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत को अधिक समावेशी, संतुलित और दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे ले जाएगा। कहा कि यह अधिनियम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कानून मात्र नहीं है। यह बदलते और नए भारत के निर्माण की आधारशिला है, जहां महिलाएं सिर्फ मतदाता नहीं रहेंगी। बल्कि वे देश की नीति और भविष्य तय करने वाली शक्ति भी बनेंगी।
 
जमशेदपुर से कोयलांचल लाइव के लिए बिनोद केसरी की रिपोर्ट