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आयुर्वेद और हर्बल खेती को लेकर एक नई उम्मीद

3/24/2026 12:26:33 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड स्थित लखाईडीह गांव में आयुर्वेद और हर्बल खेती को लेकर एक नई उम्मीद जगी है। आयुर्वेदश्री हर्बल्स  लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. कर्ण राजहंस ने गांव का दौरा कर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदाओं और जड़ी-बूटियों की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया। इस दौरे की पृष्ठभूमि भी बेहद महत्वपूर्ण रही। इससे पहले लखाईडीह के ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने नई दिल्ली में आयुर्वेद एवं हर्बल खेती से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और उद्यमियों के साथ एक अहम बैठक की थी। उन्होंने इन विशेषज्ञों को लखाईडीह और आसपास के क्षेत्रों का दौरा करने का आग्रह किया था, जिसके परिणामस्वरूप यह पहल साकार हो सकी। दौरे के दौरान डॉ. राजहंस ने पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों का निरीक्षण किया और उनके संरक्षण तथा वैज्ञानिक शोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इन वन संपदाओं का सही तरीके से संरक्षण और संवर्धन किया जाए, तो यह क्षेत्र देश के हर्बल मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार देश के अन्य राज्यों में “हर्बल क्रांति” ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, उसी तरह झारखंड भी अपनी प्राकृतिक संपदाओं के बल पर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कभी नक्सल प्रभावित “रेड जोन” के रूप में पहचाना जाने वाला यह इलाका अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है और विकास के नए अवसरों के लिए तैयार है।डॉ. राजहंस ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यदि योजनाबद्ध तरीके से हर्बल खेती, प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए, तो स्थानीय आदिवासी और मूलवासी समुदायों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि पलायन जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।लखाईडीह में यह पहल अब एक नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।
 
कोलयांचल लाइव के लिए जमशेदपुर से बिनोद केसरी की रिपोर्ट