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जिस घर में नित्य हरि कीर्तन होता है, वहाँ कलियुग प्रवेश नहीं कर सकता - श्री जीयर स्वामी जी महाराज

5/26/2026 3:39:15 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ara  : सफेद कपड़े में थोड़ी भी स्याही का दाग पड़ने से वह दाग बहुत स्पष्ट दीखता है, उसी प्रकार पवित्र मनुष्योंका थोड़ा सा दोष भी अधिक दिखलायी देता है। जिस घर में नित्य हरि कीर्तन होता है, वहाँ कलियुग प्रवेश नहीं कर सकता। जब भगवान्के आश्रित हो रहे हो तो यह न हुआ, वह न हुआ आदि चिन्ताओं में मत पड़ो ।विश्वासी भक्त आजीवन भगवान्‌का दर्शन न मिलकर भी भगवान् को नहीं छोड़ता। संसार कच्चा कुआँ है । इसके किनारेपर खूब सावधानी से खड़े होना चाहिये। तनिक असावधान होते ही कुएँमें गिर पड़ोगे, तब निकलना कठिन हो जायेगा ।संसारी! तुम संसारका सब काम करो; किन्तु मन हर घड़ी संसारसे विमुख रखो ।कामिनी और कञ्चन ही माया है। इनके आकर्षणमें पड़नेपर जीवकी सब स्वाधीनता चली जाती है । इनके मोहके कारण ही जीव भव-बन्धनमें पड़ जाता है।संसारमॆ रहनेसे सुख-दुःख रहेगा ही । ईश्वरकी बात अलग है और उसके चरण-कमलमें मन लगाना और है। दुःखके हाथसे छुटकारा पानेका और कोई उपाय है नहीं ।साधु-संग करनेसे जीव का मायारूपी नशा उतर जाता है ।भगवान् का भजन ही जीवनका सुफल है।सुगम मार्गसे चलो और सुखसे राम-कृष्ण-हरिनाम लेते चलो। वैकुण्ठका यही अच्छा है।और समीपका रास्ता । जिस सङ्गसे भगवत्प्रेम उदय होता है वही सङ्ग सङ्ग है, बाकी तो नरकनिवास होता है।  संतोंके द्वारपर श्वान होकर पड़े रहना भी बड़ा भाग्य है, क्योंकि वहाँ प्रसाद मिलता है और भगवान्का गुणगान सुननेमें आता है। कीर्तनका अधिकार सबको है, इसमें वर्ण या आश्रमका भेद-भाव नहीं । कीर्तन से शरीर हरिरूप हो जाता है। । इससे देहभाव मिट जायगा।हरिकीर्तन में भगवान्, भक्त और नाम का त्रिवेणी संगम होता है। प्रेमी भक्त प्रेम से जहाँ हरिगुण-गान करते हैं, भगवान् वहाँ रहते ही हैं । तो कीर्तन से संसारका दुःख दूर होता है । कीर्तन संसारके चारों ओर आनन्द की प्राचीर खड़ी कर देता है और सारा संसार महासुख से भर जाता है । कीर्तन से विश्व धवलित होता और वैकुण्ठ पृथ्वी पर आ जाता है ।
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट