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पुस्तकालय दिवस पर ट्राइडेंट बी.एड. कॉलेज में विशेष कार्यक्रम

8/12/2026 5:17:55 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Aara : ट्राइडेंट बी.एड. कॉलेज, गिधा-आरा में बुधवार को ‘पुस्तकालय दिवस’ एवं ‘अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस’ के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करना, पुस्तकालय के शैक्षणिक महत्व के प्रति जागरूकता पैदा करना तथा पुस्तकों को जीवनपर्यंत सीखने का सशक्त माध्यम बनाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी मां शारदे, पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन एवं युवा वर्ग के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कॉलेज के सचिव श्री मानस कुमार, चेयरपर्सन श्री रवि रंजन एवं संरक्षक डॉ. ओम प्रकाश तिवारी ने पुस्तक और पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकें विशेषकर विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षणार्थियों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शिक्षित और जागरूक युवाओं के हाथों में ही विकसित राष्ट्र की कुंजी सुरक्षित है। डिजिटल युग में सूचनाओं की उपलब्धता आसान हुई है, लेकिन सही सूचना का चयन, उसका आलोचनात्मक विश्लेषण और ज्ञान में रूपांतरण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। कार्यक्रम की संयोजक कॉलेज की लाइब्रेरियन श्रीमती प्रमोद कुमार शर्मा रहीं। डॉ. वंदना तिवारी ने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों को व्यवस्थित रखने का स्थान नहीं, बल्कि नए विचारों, ज्ञान, अनुभव और संभावनाओं के प्रस्फुटन का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विश्वसनीय ज्ञान-स्रोत उपलब्ध कराने के साथ उनकी तार्किक एवं विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने में पुस्तकालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षक-शिक्षकों में श्री तारकेश्वर राय एवं श्री देवेंद्र यादव ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि स्वयं भी निरंतर सीखता रहता है। उन्होंने भावी शिक्षकों में अध्ययनशीलता और स्वाध्याय की प्रवृत्ति विकसित करने को शिक्षक-शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया। कार्यक्रम में यह संदेश भी प्रमुखता से सामने आया कि “पुस्तकें परीक्षा के लिए नहीं, जीवन को समझने के लिए पढ़ी जानी चाहिए।” वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न विचारधाराओं, संस्कृतियों, समाजों और मानवीय अनुभवों से परिचित होते हैं, जिससे उनमें संवेदनशीलता, रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और व्यापक दृष्टिकोण का विकास होता है। इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों ने पुस्तकालय के नियमित उपयोग, संदर्भ पुस्तकों के अध्ययन, समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं के पठन तथा शैक्षणिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। भारतीय ज्ञान परंपरा में ऋषियों, पांडुलिपियों और ज्ञान-संरक्षण की समृद्ध परंपरा का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत की ज्ञान-संपदा को आधुनिक पुस्तकों, डिजिटल रिपॉजिटरी और नवीन शैक्षणिक तकनीकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षक-शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए पुस्तक-पठन को अपनी दैनिक शैक्षणिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन ट्राइडेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में महाविद्यालयीय ग्रंथालय में किया गया। इसमें महाविद्यालय की प्राचार्या, शिक्षकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं बी.एड. के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट