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जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने UPI पर ₹2000 से अधिक के लेनदेन पर  डिस्काउंट रेट MDR लगाने पर  सरकार और एनपीसीआई NPCI के फैसले पर कड़ा विरोध...

9/23/2026 1:43:41 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Jamtara : भारत सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया NPCI ने देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले UPI पर आगामी 15 अक्टूबर से ₹2000 से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट ,व्यापारी डिस्काउंट रेट MDR लगाने के सरकार और एनपीसीआई NPCI के फैसले पर जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने गहरी चिंता के साथ कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अव्यवहारिक और जन विरोधी फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो देश का हर छोटा और बड़ा व्यापारी वर्ग कैश लेनदेन पर वापस लौटने के लिए मजबूर हो जाएगा। साथ ही साथ सरकार और NCPI के इस कदम से न केवल छोटे व मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा बल्कि देश के सफल डिजिटल इंडिया अभियान को भी करारा झटका लगेगा पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति की है जिसका मुख्य आधार UPI का मुफ्त और सुलभ होना था अब 0.4% MDR और उस पर लगने वाले अतिरिक्त GST के कारण व्यापारियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। फैसले के विरोध में मुख्य बिंदु और आपत्तियां --डिजिटल लेनदेन में गिरावट का डर शुल्क लागू होने से कई छोटे और थोक व्यापारी दोबारा नगद लेनदेन की तरफ लौटने पर मजबूर होंगे जिससे डिजिटल इकोनामिक की रफ्तार धीमी हो जाएगी। उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ भले ही या शुक्ल व्यापारी पर लगाया जा रहा हो लेकिन जब व्यापार का दाम घटने लगेगी तो अंततः वित्तीय बोझ किसी न किसी रूप में उपभोक्ताओं कीजिए पर ही ट्रांसफर होगा जिससे बाजारों में महंगाई और असंतोष बढ़ेगा। कैशलेस इकोनॉमी को लगेगा बड़ा झटका---- जिस डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी का सपना देख कर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपने के लिए प्रेरित किया था यह फैसला उसे भरोसे का हनन है। शुल्क लागू होने से देश में काले धन और समानांतर अर्थव्यवस्था को फिर से बढ़ावा मिल सकता है। 0.4% MDR के फैसले को तत्काल और पूर्ण रूप से रद्द किया जाए, UPI को पहले की तरह पूरी तरह से निशुल्क और पारदर्शी रखा जाए ताकि डिजिटल क्रांति की रफ्तार धीमी ना पड़े। भारत सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यदि 15 अक्टूबर तक इस काले कानून को वापस नहीं लेती है तो देश के सभी व्यापारिक संगठन देशव्यापी आंदोलन और डिजिटल भुगतान के बहिष्कार जैसा कड़ा कदम उठाने से भी व्यापारी पीछे नहीं हटेंगे।
 
जामताड़ा से कोयलांचल लाइव के लिए निशिकांत मिस्त्री की रिपोर्ट