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 राजद का एमएमडीआर कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन , किया केंद्र सरकार से बिल वापस लेने की मांग! .....

9/24/2026 11:55:30 AM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Jamtara : केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम यानी एमएमडीआर कानून को लेकर विपक्षी दलों का विरोध लगातार जारी है। इसी क्रम में गुरुवार को जामताड़ा के पुराना कोर्ट परिसर स्थित धरना स्थल पर राष्ट्रीय जनता दल की ओर से एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजद जिलाध्यक्ष दिनेश यादव ने की। इस मौके पर महिला जिलाध्यक्ष अर्चना यादव, प्रधान महासचिव अशोक चौधरी समेत धरना में पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता एवं नेता शामिल हुए।
धरना-प्रदर्शन के दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना-प्रदर्शन के दौरान राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
कार्यकर्ताओं ने एमएमडीआर कानून को झारखंड के हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। इस दौरान पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों का जीवन खनिज संपदा से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में खान एवं खनिज से संबंधित कानूनों में किए जा रहे बदलावों का असर राज्य के अधिकारों और आम लोगों पर पड़ सकता है। वक्ताओं ने कहा कि राजद इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन करता रहेगा।
धरना-प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राजद जिलाध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए खान एवं खनिज अधिनियम के विरोध में पार्टी की ओर से यह धरना आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस बिल को वापस नहीं लेती है, तब तक राष्ट्रीय जनता दल इसका विरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी झारखंड के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलन करती रहेगी।
वहीं राजद के प्रधान महासचिव अशोक चौधरी ने भी एमएमडीआर कानून का विरोध करते हुए इसे झारखंड के लोगों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा पर यहां के लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से कानून पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
 
जामताड़ा से कोयलांचल लाइव के लिए निशिकांत मिस्त्री की रिपोर्ट