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स्वच्छता सर्वेक्षण में दुमका-बासुकीनाथ रैंकिंग से बाहर, करोड़ों खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल ?

9/24/2026 7:02:27 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dumka : झारखंड की उपराजधानी दुमका जिला मुख्यालय 21 वार्ड के साथ नगर परिषद के तौर पर वर्ष 1902 से स्थापित है वहीं विश्वप्रसिद्ध बाबा बासुकिनाथ धाम की व्यवस्था चकाचक  रखने के लिए नगर पंचायत को स्थापित किया गया है लेकिन असीमित खर्च के बाद भी स्वच्छता सर्वेक्षण से बाहर होना जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय है और भादो मेला को सफाई करने वाली ठेका कंपनी भी विवादों के घेरे में है क्योंकि नगर पंचायत के अध्यक्ष ने प्रमंडलीय आयुक्त से इसकी शिकायत की है ।
 राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस बार दुमका नगर परिषद और बासुकीनाथ नगर पंचायत दोनों को कोई रैंक या स्थान नहीं मिला है। पिछले वर्ष 2024-25 में दुमका जिले को राज्य स्तर पर 13वां स्थान प्राप्त हुआ था। करीब 48 हजार की आबादी वाले दुमका शहर का इस बार रैंकिंग से बाहर होना नगर की स्वच्छता व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली और स्वच्छता प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं।  कचरा प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। घर-घर कचरा उठाव के साथ सूखे और गीले कचरे को अलग करने की व्यवस्था भी प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सकी है। शहर में एकत्रित कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का असर भी स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर कचरा डंप किए जाने से लोगों और राहगीरों को परेशानी होती है। इस लचर व्यवस्था को लेकर दुमका के पूर्व सांसद और जामा से पूर्व विधायक ने दुमका विधायक दुमका प्रशाशन और झारखंड सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाया है ।
दुमका को कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग में कोई स्टार नहीं मिला है। यह स्थिति शहर में कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नाली और जल निकासी की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। बारिश के दौरान कई इलाकों में नालियों का पानी सड़कों और घरों तक पहुंचने की शिकायत सामने आती रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में खराब प्रदर्शन के बाद अब सवाल उठ रहा है कि नगर परिषद की योजनाएं और स्वच्छता अभियान जमीन पर कितने प्रभावी हैं? केवल सफाई के दावों के बजाय कचरा उठाव, प्रसंस्करण, निस्तारण और जल निकासी की व्यवस्था में ठोस सुधार की जरूरत है। वहीं दुमका और बासुकीनाथ की रैंकिंग से बाहर होने के बाद नगर प्रशासन की जवाबदेही तय करने और स्वच्छता व्यवस्था की कमियों की समीक्षा की मांग जोर पकड़ सकती है। वहीं बासुकिनाथ धाम में श्रावणी मेले की सफाई के लिए अलग टेंडर होता है ,भादो महीना के लिए अलग टेंडर होता है और बाकी साल के दस महीने के लिए अलग से टेंडर होता है और मात्र 11 वार्ड वाले बासुकिनाथ नगर पंचायत में करोड़ों रुपए सफाई के लिए खर्च किए जाते हैं लेकिन यह रिपोर्ट यह साबित कर दिया कि सफाई के नाम पर सिर्फ लुट खसोट किया गया है । बार बार वही ठेकेदार को लेकर नगर पंचायत बासुकिनाथ के अध्यक्ष ने भादो मेला की सफाई के लिए बिना अध्यक्ष की सहमति के कार्यपालक द्वारा ठेका दिए गए ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसकी शिकायत प्रमंडलीय आयुक्त से भी की है कि राकेश मिश्रा नामक ठेकेदार के परिवार में वार्ड पार्षद भी है और वही ठेकेदारी कई वर्षों से करते आ रहे हैं और सफाई व्यवस्था उनकी अच्छी नहीं है अध्यक्ष ने इसका विरोध किया और लड़ाई भी लड़ रही है लेकिन अधिकारियों ने मनमानी तरीके से उसे ही ठेका दिया जिसका विरोध है और यही कारण है कि सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है ।
अब सवाल यह है  दुमका को स्वच्छ शहर बनाने के दावे और जमीनी हकीकत में इतना अंतर क्यों? और सवाल यह भी की  बासुकिनाथ धाम जैसे पवित्र विश्वप्रसिद्ध तीर्थ स्थल में करोड़ो खर्च करने के बाद यह स्थिति क्यों ? अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बावजूद अधिकारियों ने वैसे व्यक्ति को ठेका क्यों दिया ये बड़ा सवाल है ।
 
दुमका से कोयलांचल लाइव के लिए विजय तिवारी की रिपोर्ट