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बिहार विधान परिषद चुनाव में बिना वोटिंग तय हुआ परिणाम,पहली बार सदन पहुंचे निशांत कुमार और पवन सिंह

6/11/2026 6:39:43 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Patna : बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव में इस बार एक अनोखी स्थिति देखने को मिली। सभी सीटों पर केवल उतने ही उम्मीदवार मैदान में रहे जितनी सीटें थीं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इस कारण मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
यह परिणाम राज्य की राजनीतिक रणनीति और दलों के बीच बने समीकरणों का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
 
पहली बार सदन पहुंचे निशांत कुमार और पवन सिंह
इस चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रहे। लंबे समय से राजनीति में उनकी संभावित सक्रिय भूमिका को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन अब वे पहली बार विधान परिषद के सदस्य बने हैं। इसे जदयू की भविष्य की राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं भाजपा की ओर से भोजपुरी फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता और गायक पवन सिंह भी पहली बार विधान परिषद पहुंचे हैं। हालांकि प्रमाणपत्र वितरण के समय उनकी अनुपस्थिति में उनके भाई ने सर्टिफिकेट प्राप्त किया।
 
किन-किन उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद निर्वाचित हुए हैं।
भाजपा की ओर से पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित ने जीत हासिल की।लोजपा (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल से सुनील सिंह भी निर्विरोध विधान परिषद पहुंचे।
 
किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
इस चुनाव में एनडीए ने अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखा।
जदयू – 4 सीट
भाजपा – 4 सीट
लोजपा (रामविलास) – 1 सीट
राजद – 1 सीट
इस प्रकार कुल 10 सीटों में से 9 सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी राजद को एक सीट मिली।
 
मतदान क्यों नहीं हुआ?
कई लोगों के मन में यह सवाल है कि चुनाव होने के बावजूद वोटिंग क्यों नहीं कराई गई।
दरअसल, विधान परिषद की 10 सीटों के लिए केवल 10 वैध नामांकन पत्र ही दाखिल हुए। किसी भी सीट पर उम्मीदवारों की संख्या सीटों से अधिक नहीं थी। निर्वाचन नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है और मतदान की आवश्यकता नहीं रहती।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर क्यों उठ रहे सवाल?
चुनाव परिणाम के बाद सबसे अधिक चर्चा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। उन्हें इस बार एनडीए ने विधान परिषद का उम्मीदवार नहीं बनाया। जबकि वे पहले बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं।
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार किसी मंत्री को शपथ लेने के बाद निर्धारित समय के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो उनके मंत्री पद पर संकट उत्पन्न हो सकता है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
 
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
इस चुनाव ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिए हैं। एक ओर निशांत कुमार की विधान परिषद में एंट्री को जदयू के भविष्य के नेतृत्व की संभावित तैयारी माना जा रहा है, वहीं पवन सिंह की जीत भाजपा के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
एनडीए का 9 सीटों पर निर्विरोध जीतना यह भी दर्शाता है कि गठबंधन ने इस चुनाव में अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रखी है।
 
निष्कर्ष: बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 बिना मतदान के संपन्न होकर भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। निशांत कुमार और पवन सिंह जैसे नए चेहरों की एंट्री ने चुनाव को विशेष बना दिया है, जबकि दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का नया केंद्र बन सकते हैं। आने वाले समय में इन नए सदस्यों की भूमिका और राजनीतिक सक्रियता पर सभी की नजर रहेगी।
 
 
कोयलांचल लाइव के लिए पटना से चंदन चौरसिया की रिपोर्ट 
 


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