रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी को जांच के दौरान कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच के मुताबिक, JPSC की परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को दी गई थी। इसी एजेंसी को ठेका दिलाने और परीक्षा संचालन के एवज में कथित तौर पर रिश्वत और कमीशन के लेन-देन का मामला सामने आया है। सीआईडी के अनुसार, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने अपने कथित स्वीकारोक्ति बयान में दावा किया है कि TDPL को ठेका दिलाने के एवज में JPSC के पूर्व अध्यक्ष और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एल. खियांग्ते के नाम पर दो करोड़ रुपये का सौदा तय हुआ था। इसके अलावा, परीक्षा संचालन के एवज में एजेंसी को होने वाले भुगतान का 20 प्रतिशत कमीशन देने की शर्त भी रखे जाने का दावा किया गया है। JPSC नियुक्ति घोटाला मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सीआईडी ने 22 जुलाई को अभय कुमार तिवारी को गोड्डा से गिरफ्तार किया था। उस समय वह गोड्डा के पोड़ैयाहाट प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था।
सीआईडी ने इससे पहले मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि अभय तिवारी के कथित बयान के आधार पर धर्मेंद्र कुमार की गिरफ्तारी हुई। अभय तिवारी के कथित बयान के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार ने TDPL को JPSC में OTR, OMR, एडमिट कार्ड, उपस्थिति पंजी तैयार करने और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बदले कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग की गई थी। आरोप है कि धर्मेंद्र कुमार ने TDPL के कुछ अभ्यर्थियों को JPSC परीक्षा में पास कराने का भी आश्वासन दिया था। अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को दी, जिसके बाद कंपनी की ओर से इन शर्तों पर सहमति जताई गई।
जांच के दौरान सामने आए कथित घटनाक्रम के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार से बातचीत के बाद TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी तथा आनंद उर्फ सानंद प्रकाश की मुलाकात JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से हुई थी। यह मुलाकात रांची के रेडिशन ब्लू होटल में होने का दावा किया गया है। कथित तौर पर इस मुलाकात में एल. खियांग्ते ने एजेंसी की क्षमता और संसाधनों को देखने के बाद निर्णय लेने की बात कही थी। इसके करीब दो दिन बाद TDPL की ओर से JPSC अध्यक्ष और सदस्यों के सामने प्रस्तुति दी गई। इसके बाद एल. खियांग्ते ने TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को धर्मेंद्र कुमार से संपर्क करने को कहा और एजेंसी की फाइल परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंपे जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है।
सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने अपने कथित बयान में बताया कि एजेंसी की प्रस्तुति के बाद मोरहाबादी मैदान में धर्मेंद्र कुमार और TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के साथ उनकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि TDPL को काम दिलाने के एवज में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को दो करोड़ रुपये देने होंगे। इसके अलावा, धर्मेंद्र कुमार के लिए 20 से 25 लाख रुपये कमीशन और परीक्षा संचालन के एवज में एजेंसी को मिलने वाली बिलिंग की 20 प्रतिशत राशि अलग से देने की बात कही गई थी। अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, TDPL ने इन शर्तों पर सहमति जताई थी। अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि JPSC की एक सीट के एवज में 30 से 40 लाख रुपये तक मिलने की उम्मीद थी, इसलिए एजेंसी ने कथित कमीशन की शर्त को स्वीकार कर लिया। मोरहाबादी मैदान में हुई मुलाकात के बाद स्टेट गेस्ट हाउस में एल. खियांग्ते के साथ बैठक होने का भी दावा किया गया है। कथित तौर पर इस बैठक में खियांग्ते ने सभी संबंधित लोगों को धर्मेंद्र कुमार के संपर्क में रहने को कहा था। हालांकि, ये सभी बातें सीआईडी जांच में सामने आए कथित बयानों और आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित आरोपितों या अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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