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गया जी में पिंडदान पर कभी लगता था जजिया कर! शहरचंद्र चौधरी की पहल से हटने का दावा, आलमगीरपुर भी मिला
 

8/13/2026 2:45:18 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
गया : विश्व प्रसिद्ध मोक्षस्थली गया जी के इतिहास से जुड़ी एक रोचक कहानी सामने आती है। स्थानीय परंपरा और गयापाल पंडा समाज के अनुसार, मुगल शासन के दौरान गया जी में पिंडदान करने आने वाले हिंदू तीर्थयात्रियों से जजिया कर वसूला जाता था। इससे श्रद्धालुओं की संख्या कम होने लगी और गयापाल पंडा समाज की आजीविका भी प्रभावित होने लगी। बताया जाता है कि उस समय गयापाल पंडा समाज के मुखिया शहरचंद्र चौधरी ने इस मामले को उठाया और दिल्ली दरबार पहुंचकर तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब के सामने गया जी की धार्मिक महत्ता और जजिया कर से होने वाली परेशानियों को रखा। पंडा समाज के दावों के मुताबिक, शहरचंद्र चौधरी की बातों से प्रभावित होकर औरंगजेब ने गया जी में पिंडदान पर लगाया गया जजिया कर हटाने का आदेश दिया। साथ ही आलमगीरपुर की जागीर पंडा समाज को सौंपे जाने की भी बात कही जाती है। स्थानीय लोगों और पंडा समाज के अनुसार, बाद में आलमगीरपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में गयापाल पंडा परिवार आकर बस गए और यही इलाका आगे चलकर अंदर गया के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी यह क्षेत्र गया की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है। विष्णुपद प्रबंध कारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल के अनुसार, यह प्रसंग गयापाल पंडा समाज के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। हालांकि, जजिया कर हटाने और आलमगीरपुर की जागीर सौंपे जाने से जुड़ी ये बातें स्थानीय परंपराओं और समाज के कथनों पर आधारित हैं।
 
 
 गया कोयलांचल लाइव के लिए मनोज कुमार की रिपोर्ट