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जेपी आंदोलन के साथी आज कहां हैं? जमीन दान करने वाले विद्यानंद आज भी अस्पताल में लगाते हैं झाड़ू.....

10/5/2026 1:10:30 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Aara : यह कहानी है भोजपुर के दुबौली गांव के रहने वाले 70 वर्षीय विद्यानंद पाण्डेय की—एक ऐसे व्यक्ति की, जिन्होंने समाज के हित में अपनी जमीन सरकार को दान कर दी। उनकी जमीन पर आज सरकारी स्वास्थ्य केंद्र खड़ा है, जहां आसपास के ग्रामीण इलाज कराने पहुंचते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस अस्पताल के लिए उन्होंने जमीन दान की, उसी अस्पताल में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण आज भी वे खुद झाड़ू लगाते हैं। विद्यानंद पाण्डेय का जीवन जेपी आंदोलन की यादों से भी जुड़ा है। उनका दावा है कि 1974 के आंदोलन के दौरान वे नीतीश कुमार के साथ जेल गए थे। हालांकि उपलब्ध ऐतिहासिक रिपोर्टों के मुताबिक नीतीश कुमार की दुबौली गांव से गिरफ्तारी जून 1976 में आपातकाल के दौरान हुई थी। विद्यानंद पाण्डेय बताते हैं कि आंदोलन के दौर में दुबौली गांव से पुलिस ने नीतीश कुमार को गिरफ्तार किया था। पाण्डेय का कहना है कि नीतीश कुमार उनके मित्र रहे हैं और उसी दौर की दोस्ती आज तक कायम है।
समय बदला, हालात बदले और नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के शीर्ष पद तक पहुंचे। लेकिन विद्यानंद पाण्डेय आज भी अपनी सादगी और सामाजिक सेवा के रास्ते पर कायम हैं। उन्होंने जनहित में अपनी जमीन सरकार को दान कर दी, ताकि वहां अस्पताल बन सके। अस्पताल तो बन गया, लेकिन अब डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी उन्हें खलती है।
अस्पताल में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण पाण्डेय खुद सुबह पहुंचते हैं और परिसर में झाड़ू लगाकर सफाई करते हैं। उनका कहना है कि जमीन दान करना सिर्फ कागज पर दान नहीं है। जिस उद्देश्य से जमीन दी गई है, उस उद्देश्य की पूर्ति और उसकी देखभाल भी जरूरी है।
विद्यानंद पाण्डेय के मुताबिक, महीने में एक-दो बार वे पटना भी जाते हैं। उनका कहना है कि नीतीश कुमार के बुलावे पर वे उनसे मिलने पहुंचते हैं। लेकिन पाण्डेय के मन में एक कसक भी है,उनके साथ आंदोलन के दौर में रहने वाले कई साथी आज काफी आगे निकल चुके हैं, जबकि वे आज भी उसी साधारण जीवन में हैं। “हम लोगों ने उस समय आंदोलन में साथ दिया था। कई साथी आज बहुत आगे निकल गए, लेकिन मैं जहां था, आज भी वहीं हूं। मैंने जनहित के लिए अपनी जमीन दे दी, ताकि लोगों के काम आ सके। मेरी इच्छा सिर्फ इतनी है कि अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था हो और लोगों को बेहतर इलाज मिले। जेपी आंदोलन के सेनानियों को सरकारी स्तर पर पेंशन और अन्य लाभ देने की व्यवस्था है, लेकिन कई आंदोलनकारियों के लाभ से वंचित रहने के मामले सामने आते रहे हैं। वर्ष 2025 में भी बिहार में ऐसे लोगों का मामला सामने आया था, जिनके जेल रिकॉर्ड में खामियों के कारण उन्हें लाभ नहीं मिल सका। 
एक तरफ राजनीति में साथ चलने वाले कई लोग समय के साथ ऊंचाइयों तक पहुंचे, तो दूसरी तरफ विद्यानंद पाण्डेय ने अपनी जमीन समाज को दे दी और आज भी उसी सेवा भाव के साथ अस्पताल की सफाई करते नजर आते हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सवाल को भी सामने लाती है कि जनहित में दान की गई संपत्ति का इस्तेमाल कितना प्रभावी हो रहा है और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, स्टाफ और सफाईकर्मियों की कमी कब दूर होगी?
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट