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 विवाहित महिलाओं ने सिंदूर खेलकर माँ दुर्गा को दी अंतिम विदाई 
 

10/21/2026 12:23:20 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Jamshedpur : आज भक्ति, रंग और भावुकता से सराबोर रहा, विजयदशमी के पावन अवसर पर शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में विवाहित महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर माँ दुर्गा को अंतिम विदाई दी। लाल साड़ियों में सजी सुहागिन महिलाएँ सुबह से ही पंडालों में पहुँचने लगीं। सुंदरनगर, सोनारी, कदमा, बिष्टुपुर, साकची और मानगो इलाकों के पूजा पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुंदरनगर सर्वजनिक दुर्गा एवं काली पूजा कमिटी पूजा पंडाल  में तो माहौल और भी खास था। जहाँ महिलाओं ने माँ दुर्गा की प्रतिमा के सामने आरती उतारी, फूल चढ़ाए और फिर शुरू हुआ सिंदूर का वह अनोखा खेल, जो बंगाली परंपरा की सबसे भावुक और रंगीन रस्म मानी जाती है।
सिंदूर खेला की परंपरा और भावना सिंदूर खेला सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और माँ के आशीर्वाद का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि विजयदशमी के दिन माँ दुर्गा अपने मायके (पृथ्वी) से ससुराल (कैलाश पर्वत) लौटती हैं। विदाई से पहले विवाहित महिलाएँ माँ को सिंदूर अर्पित करती हैं, मानो उन्हें यह आशीर्वाद दे रही हों कि उनका वैवाहिक जीवन भी उतना ही अखंड और मंगलमय रहे। फिर वे एक-दूसरे के माथे, गालों और बालों में सिंदूर लगाती हैं और सुख-समृद्धि, लंबे सुहाग तथा परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। आज जमशेदपुर की महिलाओं ने इसी परंपरा को पूरे जोश और श्रद्धा से निभाया। लाल साड़ी, चूड़ियों की खनक और सिंदूर की चमक से पूरा पंडाल लालिमा से नहा उठा। ढोल-ढाक की थाप और शंखनाद के बीच महिलाएँ हँसती-खेलती, एक-दूसरे को सिंदूर लगाती और माँ के चरणों में सिर झुकाती रहीं। कई महिलाओं की आँखें नम हो गईं जब उन्होंने माँ से कहा—माँ, अगले साल फिर आना,हम इंतज़ार करेंगे।
 
जमशेदपुर से कोयलांचल लाइव के लिए बिनोद केसरी की रिपोर्ट।