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बाढ़ राहत पर प्रशांत किशोर ने नितिन नवीन को घेरा । 

10/24/2026 12:30:09 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Patna : जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बीजेपी नेता नितिन नवीन के बाढ़ राहत के लिए अपनी तीन महीने की सांसद वाली सैलरी दान करने के फैसले पर सवाल उठाया है। प्रशांत किशोर का आरोप है कि प्रशांत किशोर ने नितिन नवीन पर अपनी छवि चमकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आपदा के समय राहत के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल करके उसका प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी बिहार के बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहती है, तो बीजेपी के पास मौजूद 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के फंड में से पैसा दिया जाना चाहिए। नितिन नवीन ने क्या किया? नितिन नवीन ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह राज्यसभा सांसद के तौर पर मिलने वाली तीन महीने की सैलरी के बराबर 6.35 लाख रुपये बिहार मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे।
इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई सांसदों और मंत्रियों ने भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक महीने की सैलरी राहत कोष में देने की घोषणा की। बीजेपी ने पहले भी दिया था चंदा,इससे पहले बिहार बीजेपी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये दान किए थे। बिहार इस समय गंभीर बाढ़ की स्थिति से जूझ रहा है। करीब 15 जिलों में 49.72 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और बक्सर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं। कई जगहों पर गंगा, कोसी, पुनपुन, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए करीब 303 सामुदायिक रसोई और 7 राहत शिविर चलाए जा रहे थे, जहां लगभग 9,003 लोगों को राहत दी जा रही थी। नवीन ने शुक्रवार को कहा था कि वे सांसद के तौर पर अपनी तीन महीने की सैलरी के बराबर 6.35 लाख रुपये बिहार मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर रहे हैं। एक दिन बाद, सीएम सम्राट चौधरी और कई सांसदों और मंत्रियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए फंड में एक महीने की सैलरी दान की। इससे पहले, बिहार बीजेपी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये दान किए थे। बिहार गंभीर बाढ़ से जूझ रहा है, जिससे 15 जिलों में लगभग 49.72 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और बक्सर सबसे ज़्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं। गंगा, कोसी, पुनपुन, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा नदियां कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं, जिसके कारण प्रशासन को प्रभावित इलाकों में लगभग 9,003 लोगों के लिए 303 कम्युनिटी किचन और सात राहत शिविर चलाने पड़े।
 
संजना सिंह कोयलांचल लाइव डेस्क ।