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परिदृश्य बिहार : सीट बंटवारे  पर " एनडीए " से ज्यादा मत्थापच्ची  " इंडिया " गठबंधन में 

9/29/2025 3:49:08 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Patna : उछल कूद करके रोज घर बदलना कोई राजनीति नहीं यह छिंछोरापन है ? जी हां बिहार में विधानसभा चुनाव की आगाज हो चुकी   है ।राष्ट्रीय स्तर पर भारत में फिल्हाल दो महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधन है "एनडीए" और" इंडिया" गठबंधन बिहार विधान सभा  चुनाव को लेकर दोनों में ही चहल कदमी काफी बढ़ी हुई है । सीट बंटवारे के प्रश्न पर दोनों ही गठबंधन चिंतित है की क्या होगा राज्य में इस बार उनके दल सहित उनका व्यक्तिगत रजनीतिक भविष्य ? और सीट बंटवारे के फैसले को कौन समझेगा तथा कौन रूठेगा ? लेकिन सत्ताधारी एनडीए का फैसला लगभग तय हो चुकी  है। एनडीए का मुख्य दल भाजपा ने पिछले दिनों राज्य में तथा दिल्ली में बैठकर इसके लिए गणित सेट कर लिया है केवल घोषणा बाकी है। एनडीए का निर्णय है कि अबकी बार चुनाव में भाजपा और जदयू बड़े भाई और छोटे भाई की भूमिका  में फिर से उतरेंगे । यानी जदयू को 102 और भाजपा को 101 सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। शेष 40 सीट अन्य घटक दलों को दिया जाना है जिसमें सभी घटक अपने-अपने ढंग से मुंह पीजाय बैठे हैं। कोशिश होगी कि चुनाव में मुख्य घटक दल लोजपा (रामविलास) को 25 से 28 सीट देकर उसे मनाया जाय । जबकि जीतन राम माझी तथा उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक दल को क्रमशः 7 से 8 और 3 से 4 सीट देकर उन्हें मनाने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में इन घटक दल भी बहुत कुछ उछल कूद करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार ने इन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देकर पहले से बांधने का उपाय कर रखा है और खुदा ने खास्ते अगर यह खिसके भी  तो दूसरे से अधिक अपना नुकसान करेंगे और उसका नतीजा बिहार विधानसभा चुनाव का आने वाला आगामी परिणाम दिखा देगा ऐसा जानकारों का मानना है। एनडीए गठबंधन की बात तो हो गई लेकिन इंडिया गठबंधन में स्थिति अभी भी भयावह  बनी हुई है। पिछले कई चुनाव से लगातार पीट रही कांग्रेस 70 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक रही है जबकि राजद 100 से अधिक सीटों पर अपना प्रत्याशी लड़ने की फिराक में है । इतना ही नहीं वाम दल भी अपनी जमीन के अनुसार भरपूर प्रयास में है कि वह भी अपनी औकात से अधिक सीट के जरिए चुनावी समर में उतरे। ऐसे में एनडीए से अधिक सीट  की मथापच्ची इंडिया गठबंधन में है। जहां तक कांग्रेस की बात है तो कांग्रेस का परफॉर्मेंस पिछले कई चुनाव से बिहार में नकारात्मक रहा है और फिल्हाल उसे ज्यादा सीट लेकर चुनाव लड़ना इस राज्य में उसके भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। ऐसे में इंडिया गठबंधन में चुनावी समर के लिए यहां सीट की लड़ाई एनडीए से भी अधिक मत्थापच्ची है। 
 
 उमेश तिवारी कोयलांचल लाइव डेस्क


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