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छोटी नदियों पर संकट: आईआईटी-आईएसएम का 'मिशन Y', कोयला कंपनियों की मनमानी से बढ़ा खतरा
 

3/24/2026 4:08:24 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dhanbad : देश की छोटी नदियां आज गंभीर संकट में हैं। पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और जल संकट गहराता जा रहा है। इसी चिंता के बीच धनबाद के आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने ‘मिशन Y’ के तहत इन नदियों को बचाने की पहल शुरू की है। पिछले 5 वर्षों से इस विषय पर शोध कर रहे प्रोफेसर अंशुमाली का कहना है कि दर्जनों छोटी नदियां अतिक्रमण के कारण या तो विलुप्त हो चुकी हैं या खत्म होने के कगार पर हैं। अब संस्थान सभी छोटी नदियों का डेटा तैयार करने की योजना बना रहा है। धनबाद जिले की जमुनिया, कतरी, खुदिया, खोदो और मटकुरिया जोरिया नदी जैसी सहायक नदियां दम तोड़ रही हैं। जिससे दामोदर नदी और बराकर नदी की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। आरोप है कि कोयला उत्पादन करने वाली कंपनियां जैसे बीसीसीएल, ईसीएल और सेल सहित कई आउटसोर्सिंग कंपनियां नदियों के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ कर रही हैं। कतरास क्षेत्र के गजलीटांड़ में बिना विभागीय अनुमति के पाइप डालकर कच्चा पुल बना दिया गया, जिससे भारी वाहन गुजर सकें। वहीं बरोरा क्षेत्र के मुराईडीह के पास खोदो नदी में ओबी डंप (मिट्टी और पत्थर) कर उसकी धारा को रोक दिया गया है, जिससे नदी तालाब में तब्दील हो गई है और गंदगी फैल रही है। जमुनिया नदी के साथ भी छेड़छाड़ कर उसके मूल स्वरूप को बदलने का आरोप है। हालांकि कंपनियां कागजों पर पर्यावरण संरक्षण की बात करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। प्रो. अंशुमाली ने कहा कि धनबाद की सभी नदिया लगभग विलुप्त हो चुकी है। इन नदियों को बचाने के लिए एक योजना के तहत भूमि अधिग्रहण करना होगा और उस भूमि को नदियों को सौंपना होगा। दूसरी ओर, बाघमारा के अंचल अधिकारी गिरजानंद किस्कू ने जांच में अनियमितता की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति के गजलीटांड़ में बने पुल को हटाने का निर्देश दिया गया है और दोषियों पर कार्रवाई होगी। यह बात तो स्पष्ट है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छोटी नदियों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
 
संजना सिंह कोयलांचल लाइव डेस्क