Date: 12/06/2026 Friday ABOUT US ADVERTISE WITH US Contact Us

ऐतिहासिक कोईलवर पुल का हो रहा उन्नयन, 164 वर्ष पुरानी धरोहर बनेगी और मजबूत

6/11/2026 5:37:19 PM IST

16
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
आरा: दानापुर रेल मंडल के हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर भोजपुर जिले के बिहटा और कोईलवर स्टेशनों के बीच सोन नदी पर स्थित ऐतिहासिक कोईलवर रेल-सह-सड़क पुल (अब्दुल बारी पुल) के उन्नयन एवं आधुनिकीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है। वर्ष 1862 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान निर्मित यह पुल आज भी रेल एवं सड़क यातायात के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है। करीब 1.44 किलोमीटर लंबा यह डबल डेकर पुल बिहार के भोजपुर क्षेत्र को राजधानी पटना से जोड़ता है। पुल के ऊपरी हिस्से से रेलवे ट्रैक गुजरता है, जबकि निचले हिस्से से सड़क यातायात संचालित होता है। निर्माण के समय इसमें उच्च गुणवत्ता वाले रॉट आयरन का उपयोग किया गया था, जिसके कारण इसके पिलर आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पुल की सुरक्षा एवं संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग की जाती है। साथ ही प्रतिदिन की-मैन द्वारा इसकी फिटिंग्स और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाती है। सोन नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला यह पुल न केवल परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक और इंजीनियरिंग विरासत का भी प्रतीक है। बताया जाता है कि वर्ष 1856 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन 1857 के विद्रोह के कारण इसमें विलंब हुआ। बाद में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने वर्ष 1862 में इस पुल का उद्घाटन किया। जेम्स मीडोज रेंडेल और सर मैथ्यू डिग्बी वायट द्वारा डिजाइन किया गया यह पुल उस समय एशिया का सबसे लंबा पुल माना जाता था। यह भारत का सबसे पुराना चालू रेल-सह-सड़क पुल भी है। वर्ष 1982 में ऑस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म "गांधी" में भी इस पुल को प्रमुखता से दिखाया गया था। वर्तमान में रेलवे द्वारा पुल पर नए डिजाइन के एच-बीम स्लीपर लगाने, चेकर प्लेट बदलने तथा गर्डरों की पेंटिंग सहित कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उन्नयन कार्य पूरा होने के बाद यह ऐतिहासिक पुल आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित एवं सुचारु रूप से उपयोग में बना रहेगा।
 
कोयलांचल लाइव के लिए आरा से आशुतोष पाण्डेय की रिपोर्ट