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मुख्यमंत्री के निर्देश बेअसर! सरकारी दफ्तरों में लगे प्याऊ, लेकिन घड़े पड़े हैं खाली
6/17/2026 2:47:45 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dhanbad
: भीषण गर्मी में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी सरकारी कार्यालयों में प्याऊ लगाने का निर्देश दिया था। मकसद था कि सरकारी काम से आने वाले लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन धनबाद जिले में कई जगहों पर यह व्यवस्था सिर्फ कागजों और तस्वीरों तक सीमित नजर आ रही है। धनबाद मिश्रित कार्यालय समेत कई सरकारी दफ्तरों में प्याऊ तो लगाए गए हैं, लेकिन घड़े खाली पड़े हैं। ऐसे में लोग पानी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। झारखंड के अधिकांश सरकारी कार्यालयों में मुख्यमंत्री के निर्देश पर लगाए गए प्याऊ लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। लेकिन धनबाद जिले में कई सरकारी कार्यालयों की तस्वीर अलग है। यहां प्याऊ के नाम पर घड़े तो रखे गए हैं, मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगाई गई है, लेकिन उनमें पानी नहीं है। खाली घड़े देखकर साफ प्रतीत होता है कि व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। एगारकुंड प्रखंड कार्यालय हो या धनबाद का मिश्रित भवन, कई स्थानों पर लोगों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। भीषण गर्मी में दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को राहत मिलने के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। जब इस मामले में अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि सुबह घड़ों में पानी भर दिया जाता है, लेकिन दिनभर लोगों के उपयोग के कारण पानी खत्म हो जाता है। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि पानी खत्म हो जाता है तो उसे दोबारा भरने की जिम्मेदारी किसकी है। क्या केवल घड़े रख देना ही व्यवस्था पूरी करना माना जाएगा? गर्मी के इस मौसम में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों को वास्तविक राहत देने के लिए होना चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात में कई कार्यालयों में यह व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। सरकार की योजना लोगों को राहत देने के लिए है, लेकिन यदि जिम्मेदार अधिकारी इसकी निगरानी नहीं करेंगे तो ऐसी व्यवस्थाएं केवल फोटो और औपचारिकता तक ही सीमित रह जाएंगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस ओर कब तक गंभीर कदम उठाता है।
संजना सिंह कोयलांचल लाइव डेस्क
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