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जमशेदपुर में गूंजी 'या हुसैन' की सदाएं, अकीदतमंदों के मातमी जुलूस ने पेश की मोहब्बत, सब्र और कुर्बानी की मिसाल

6/26/2026 1:32:19 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
जमशेदपुर: मोहर्रम की 9वीं तारीख पर गुरुवार की शाम साकची स्थित हुसैनी मिशन इमामबाड़ा से अकीदत और एहतराम के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। “या हुसैन” की सदाओं, नौहाख्वानी और सीना-ज़नी के बीच पूरा इलाका गमगीन माहौल में डूबा नजर आया। बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने जुलूस में शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। इमामबाड़ा से शुरू हुआ यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए साकची गोलचक्कर तक पहुंचा। रास्ते भर लोग अलम के साथ चलते रहे, फूल चढ़ाए और अमन, भाईचारे, मुल्क की तरक्की और इंसानियत की सलामती के लिए दुआएं मांगीं। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी मौजूदगी ने जुलूस को और भी खास बना दिया। इससे पहले इमामबाड़ा में मजलिस का आयोजन हुआ, जहां मौलाना ने कर्बला की दर्दनाक वाक़िआत और हज़रत इमाम हुसैन की अज़ीम कुर्बानी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का पैगाम हर दौर में इंसाफ, सच्चाई, सब्र और ज़ुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने की सीख देता है। जुलूस के दौरान जुलजनाह भी निकाला गया, जिसे देखने और ज़ियारत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। मोहर्रम का यह मातमी जुलूस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुर्बानी, इंसानियत, मोहब्बत और आपसी भाईचारे का ऐसा पैगाम है, जो हर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहता है।
 
कोयलांचल लाइव के लिए जमशेदपुर से शिवम् मिश्रा की रिपोर्ट