बाघमारा : विश्व स्तनपान दिवस के अवसर पर बाघमारावासियों को स्वास्थ्य सेवाओं की एक महत्वपूर्ण सौगात मिली है। उप विकास आयुक्त के निर्देशानुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बाघमारा में नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर (Kangaroo Mother Care-KMC) यूनिट का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस यूनिट का उद्घाटन बाघमारा प्रखंड प्रमुख गीता देवी, प्रखंड विकास पदाधिकारी लक्ष्मण यादव, डीपीसी धनबाद, एसटीटी धनबाद तथा बाघमारा CHC के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रीनाथ ने संयुक्त रूप से किया। कंगारू मदर केयर (KMC) के बारे में जानकारी देते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रीनाथ ने बताया कि यह एक वैज्ञानिक और प्राकृतिक देखभाल पद्धति है, जो विशेष रूप से कम वजन वाले तथा समय से पूर्व जन्मे नवजात शिशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस पद्धति में नवजात शिशु को मां की छाती से सटाकर रखा जाता है, जिससे उसे मां के शरीर की प्राकृतिक गर्माहट मिलती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक नवजात के शारीरिक विकास को गति देती है, स्तनपान को प्रोत्साहित करती है तथा संक्रमण और अन्य बीमारियों से उबरने में मददगार साबित होती है। साथ ही, इससे मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। डॉ. श्रीनाथ ने बताया कि अस्पताल में तीन बेड का एक विशेष KMC कक्ष तैयार किया गया है, जो पूरी तरह सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुसज्जित है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। KMC यूनिट की शुरुआत प्रसूता महिलाओं और कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी। उद्घाटन के अवसर पर बाघमारा प्रखंड प्रमुख गीता देवी ने सभी माताओं को विश्व स्तनपान दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस नई सुविधा से कमजोर नवजातों को मां की प्राकृतिक गर्माहट मिलेगी, जिससे उनका विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न दें। बाघमारा CHC में सुरक्षित प्रसव तथा जच्चा-बच्चा की देखभाल के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाघमारा CHC में इस आधुनिक KMC यूनिट की शुरुआत होने से अब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अपने कमजोर नवजात शिशुओं के इलाज और देखभाल के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षित प्रसव और बेहतर मातृ-शिशु स्वास्थ्य की दिशा में यह एक सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल है।
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