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झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर सरकार और अभ्यर्थी आमने-सामने

8/11/2026 5:33:25 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्र और अभ्यर्थी आंदोलन अब राज्यव्यापी मुद्दा बनता जा रहा है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम किए गए हैं।
 
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी
आंदोलन का प्रमुख केंद्र 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं हो सकता। आंदोलनकारी प्रतिनिधियों की ओर से मामले की CBI अथवा न्यायिक जांच की मांग भी उठाई गई है। इसी बीच सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का प्रयास शुरू हुआ है, लेकिन बातचीत से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
 
भूख हड़ताल से बढ़ा दबाव
आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं और अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल का सहारा लिया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
 
विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई
10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। इस घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
 
आजसू छात्र संघ समेत कई संगठनों की सक्रियता
JPSC-JSSC विवाद के बीच विभिन्न छात्र संगठनों की सक्रियता भी बढ़ी है। आजसू छात्र संघ ने भी अभ्यर्थियों के समर्थन में आवाज उठाते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। इससे आंदोलन का दायरा केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित न रहकर व्यापक छात्र राजनीति से जुड़ता दिखाई दे रहा है।
 
छात्रसंघ चुनाव भी बड़ा मुद्दा
झारखंड में छात्र राजनीति का एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रसंघ चुनाव है। कई वर्षों तक चुनाव नहीं होने के कारण छात्र संगठनों में नाराजगी रही है। 2026 में राज्य के कुछ जिलों के कॉलेजों में लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने की खबर सामने आई है।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर भी छात्र संगठन लगातार सवाल उठा रहे हैं।
 
आंदोलन का राजनीतिक असर
JPSC-JSSC विवाद अब केवल छात्रों और सरकार के बीच परीक्षा संबंधी विवाद नहीं रह गया है। विपक्षी दलों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भी छात्रों के मुद्दों को समर्थन दिया है। 11 अगस्त को छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद का आह्वान भी किया गया, जिससे मुद्दे का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
 
आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच भरोसा कायम करने की है। छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है। अगर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है तो आंदोलन शांत हो सकता है। लेकिन यदि प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो झारखंड में छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, झारखंड का मौजूदा छात्र आंदोलन रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को एक साथ सामने ला रहा है। यह आंदोलन आने वाले समय में राज्य की छात्र राजनीति और रोजगार संबंधी नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
 
रांची से कोयलांचल लाइव के लिए अविनाश सिंह की रिपोर्ट