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एसआईआर की आड़ में वोटरों को परेशान करने का आरोप, कांग्रेस ने की 30 नवंबर तक समय बढ़ाने की मांग ....

9/27/2026 4:32:06 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Gumla : विशेष गहन पुनरीक्षण 2026  की प्रक्रिया को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजनील तिग्गा ने रविवार को परिसदन भवन सभागार में  एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाया है।  उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। राजनील तिग्गा ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठ रहे सवालों के बीच भाजपा प्रवक्ताओं का उनके बचाव में सामने आना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली भाजपा के हितों के अनुरूप दिखाई दे रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर कथित रूप से वोट चोरी में भूमिका होने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से 14 लिखित शिकायतें किए जाने के बावजूद उन शिकायतों पर अपेक्षित सुनवाई नहीं होती है, तो इससे निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। तिग्गा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कई वर्षों से चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और अब उनके द्वारा उठाए गए सवाल सच साबित होने की ओर बढ़ रही है।
 
एसआईआर की प्रक्रिया में बदलाव से भ्रम की स्थिति
तिग्गा ने कहा कि एसआईआर के दौरान निर्देशों और प्रक्रिया में बदलाव के कारण बीएलओ व बीएलए और आम मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है, उनका कहना था कि पूरी प्रक्रिया शुरू से स्पष्ट, सरल और पारदर्शी होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने के मामलों में कार्रवाई समान रूप से नहीं हुई। कांग्रेस ने मांग की कि यदि सामूहिक अथवा गलत तरीके से आपत्तियां दाखिल करने के मामले सामने आते हैं तो सभी पक्षों के खिलाफ एक समान नियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
 
मैपिंग के बाद भी नोटिस पर सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मतदाताओं को भी नोटिस दिए जा रहे हैं, जिनकी पूर्व मतदाता सूची से मैपिंग सही तरीके से हो चुकी है। उनका दावा है कि कई मामलों में इसे मानवीय या मैनुअल त्रुटि माना गया, इसके बावजूद मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाकर दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामूली नाम, वर्तनी अथवा अन्य मानवीय त्रुटियों के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। हर छोटी त्रुटि के लिए मतदाता को कार्यालयों और सुनवाई प्रक्रिया में भेजना आम नागरिकों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला है।
 
20 लाख नोटिस अनसर्व्ड होने का दावा
तिग्गा ने दावा किया कि करीब 20 लाख नोटिस अभी भी मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में नोटिस वितरण, सुनवाई, दस्तावेजों के सत्यापन और दावों के निपटारे की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी करने पर वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। झारखंड में एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस दिए जाने की आधिकारिक जानकारी भी सामने आई है। अगस्त में सीईओ कार्यालय के हवाले से 63.24 लाख मतदाताओं को विभिन्न श्रेणियों में नोटिस दिए जाने की जानकारी दी गई थी।
 
एएसडीडी सूची में वास्तविक मतदाताओं को लेकर चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एएसडीडीसूची में यदि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल हैं और उन्हें समय पर नोटिस नहीं मिलता है, तो दावा पेश करने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल तकनीकी खामी, नोटिस नहीं मिलने या दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। उन्होंने नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर भी निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाया। तिग्गा ने कहा कि SIR का उद्देश्य केवल पुराने मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच करना नहीं, बल्कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करना भी होना चाहिए। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
 
30 नवंबर तक एसआईआर की समय-सीमा बढ़ाने की मांग
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से झारखंड में एसआईआर की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाने की मांग की। पार्टी का कहना है कि इससे अनसर्व्ड नोटिसों को मतदाताओं तक पहुंचाने, प्रत्येक व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने, एएसडीडी सूची में शामिल वास्तविक मतदाताओं को दावा पेश करने का पर्याप्त समय देने और नए पात्र मतदाताओं को फॉर्म-6 के माध्यम से सूची में शामिल करने का अवसर मिलेगा। तिग्गा ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से किसी वास्तविक नागरिक का नाम हटना केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित करने वाला विषय है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, शिकायतों पर सुनवाई करने और राजनीतिक दलों तथा आम मतदाताओं के सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
 
कोयलांचल लाइव डेस्क