Date: 01/09/2025 Monday
ABOUT US
ADVERTISE WITH US
Contact Us
Koylanchal Live
बड़ी खबरें
देश प्रदेश
राज्य
MUMBAI
महाराष्ट्र
राजस्थान
गुजरात
उत्तराखंड
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
ओडिशा
पंजाब
झारखण्ड
उत्तर प्रदेश
जम्मू कश्मीर
दिल्ली
आंध्र प्रदेश
बिहार
छत्तीसगढ़
MADHYA PRADESH
राजधानी
रांची
पटना
लखनऊ
राजनीति
अपराध जगत
स्पोर्ट्स
वर्ल्ड न्यूज़
बिज़नेस
इंटरटेनमेंट
कोयलांचल लाइव TV
फोटो गैलरी
सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ की थी विद्रोह
6/30/2025 1:40:58 PM IST
115
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ranchi :
आज से 170 साल पहले देश पर राज कर रहे अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने की ताकत जब किसी में नहीं थी, उस दौर में झारखंड के संथाल की धरती के कुछ नायकों ने विद्रोह का बिगुल फूंका था. इसको संथाल हूल क्रांति कहा जाता है. हूल का मतलब होता है 'क्रांति या विद्रोह' और तारीख थी 30 जून 1855.
26 जुलाई को सिदो-कान्हू को दी गई थी फांसी
साहिबगंज के भोगनाडीह में एक गरीब आदिवासी परिवार के घर जन्मे सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत और महाजनी प्रथा के खिलाफ जंग छेड़ी थी. पंचकठिया में आज भी बरगद का वह पेड़ मौजूद है, जहां 26 जुलाई 1856 को अंग्रेजों ने सिद्धो-कान्हो को फांसी दी थी. अंग्रेजों के खिलाफ हूल का आगाज करने वाले दीवानों को आज पूरा देश नमन कर रहा है.
सीएम हेमंत सोरेन और राज्यपाल ने हूल दिवस पर किया
नमन
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने संदेश में लिखा कि 'हूल दिवस के अवसर पर संथाल विद्रोह के महान सेनानियों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो व अन्य वीर-वीरांगनाओं को कोटिशः नमन'. ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उनका संघर्ष एवं गौरवगाथाएं भावी पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष तथा मातृभूमि की सेवा हेतु सदैव प्रेरित करती रहेंगी.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में लिखा कि 'अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक हूल दिवस पर अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो सहित हजारों वीरों को शत-शत नमन'.
भोगनाडीह में राजकीय कार्यक्रम पर पड़ा असर
दरअसल, हर साल इस खास मौके पर भोगनाडीह में राजकीय कार्यक्रम का आयोजन होता था. इसमें खुद मुख्यमंत्री शिरकत करने जाते थे लेकिन गुरुजी की तबीयत खराब होने की वजह से इस बार भोगनाडीह जाना उनके लिए संभव नहीं हो पाया है. क्योंकि गुरु जी का इलाज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में चल रहा है. फिलहाल गुरुजी स्वास्थ्य के नाजुक दौर से गुजर रहे हैं.
चुन्नू मुर्मू और सुनी हांसदा के घर जन्में सिदो- कान्हू, इनके दो छोटे भाई चांद- भैरव और बहन फूलो-झानो की हिम्मत और शौर्य ने संथाल आदिवासियों को अंग्रेजों के खिलाफ उस दौर में एकजुट किया था, जब लड़ाई के लिए उनके पास सिर्फ तीर धनुष जैसे पारंपरिक हथियार थे. इनकी शहादत को नमन करने के लिए भोगनाडीह में एक पार्क बनाया गया है, जहां इन योद्धाओं और वीरांगनाओं की मूर्तियां लगी हुई हैं.
कोयलांचल लाइव डेस्क
Disclaimer:
Tags:
0 comments. Be the first to comment.
सम्बंधित खबरें
#
अशोक चौधरी के घर पर हुई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अनंत सिंह की मुलाकात, अनंत सिंह, ललन सिंह रोड शो में भी हुए थे शामिल
#
गणपति के लड्डू की लगी 70 हजार की बोली, विजय लक्ष्मी का परिवार बना विजेता
#
करना अखरा समिति करेगी करमा महोत्सव का आयोजन, सांसद विधयक करेंगे शिरकत
#
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने जमशेदपुर पहुंचे, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
#
एसडीओ और एसडीपीओ के नेतृत्व में मंडल कारा में की गई औचक छापेमारी, कैदियों में मचा हड़कंप
ट्रेंडिंग न्यूज़
#
Gangs of Wasseypur : गैंगस्टर फहीम खान की तबीयत बिगड़ी, घाघीडीह जेल से एमजीएम अस्पताल लाया गया
#
झारखंड के राज्यपाल पहुंचे जमशेदपुर जिले के उपायुक्त, एसएसपी ने किये स्वागत
#
"ऑपरेशन सिन्दूर " में पकिस्तान के 155 सैनिक मारे गए, पकिस्तान ने खुद कबूली बात
#
और अपराधियों की भेंट चढ़े ग्राम प्रधान सह भाजपा नेता बलराम मुंडा
#
नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने किया पर्दाफाश,मास्टरमाइंड गिरफ्तार