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एक्शन में EC : बंगाल चुनाव से पहले 2.41 करोड़ की फर्जी ‘डियर’ लॉटरी हुई जब्त,सिंडिकेट का तार जुड़ा धनबाद से
4/12/2026 12:09:43 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
आसनसोल :
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग (EC) और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय लॉटरी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। शनिवार को झारखंड-बंगाल सीमा पर स्थित मैथन-कल्याणेश्वरी चेकपोस्ट पर नाकाबंदी के दौरान एक मिनी बस से 2.41 करोड़ रुपये मूल्य की फर्जी ‘डियर’ लॉटरी बरामद की गई।
बस की तलाशी से खुला राज :
सालानपुर थाना क्षेत्र के नाका पर पुलिस ने झारखंड से आ रही मिनी बस (नंबर: WB37C5476, ‘कृपामय’) को रोका। सघन तलाशी के दौरान बस के भीतर से 9 पेटियां बरामद हुईं। जांच करने पर इनमें 1,108 बंडल लॉटरी टिकट मिले, जिनमें कुल टिकटों की संख्या 11,000 से अधिक बताई जा रही है। इन टिकटों की बाजार में कीमत करीब 2.41 करोड़ रुपये आंकी गई है।
बिहार के सासाराम से दुर्गापुर तक फैला है नेटवर्क :
पुलिस जांच में यह पता चला है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट का संचालक धनबाद के गोविंदपुर-बरवाअड्डा निवासी मशरूल अंसारी और दयामय कुम्हाकार इस काले कारोबार के मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे हैं। ये आरोपी पश्चिम बंगाल के सीतारामपुर रेड लाइट एरिया को अपना केंद्र बनाकर नेटवर्क चला रहे हैं। यह सिंडिकेट बिहार के सासाराम से शुरू होकर झारखंड के निरसा और झरिया होते हुए बंगाल के दुर्गापुर और बीरभूम तक फैला है। इस खेप को आसनसोल में पोलटू सिंह नाम के व्यक्ति को रिसीव करना था, जहाँ से इसे जामुड़िया और रानीगंज के डीलरों तक पहुँचाया जाना था।
क्या चुनाव में हो रहा था ‘पेमेंट बॉन्ड’ का खेल?
जांच एजेंसियों के लिए सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका चुनावी कनेक्शन है। जानकारों का मानना है कि इन फर्जी लॉटरी टिकटों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान ‘पेमेंट बॉन्ड’ के रूप में किया जा सकता है। यानी नकद के बजाय इन टिकटों को भुगतान के तौर पर दिया जाता है, जिसे बाद में सिंडिकेट के जरिए कैश कराया जा सकता है।
राजस्व को करोड़ों का चूना:
यह फर्जी लॉटरी असली ‘डियर’ लॉटरी की हूबहू नकल है। इससे न केवल आम जनता ठगी जा रही है, बल्कि पश्चिम बंगाल सरकार के राजस्व को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
कोयलांचल लाइव डेस्क
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