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"ठोक दो" की ठसक और 'बिहार मॉडल' का पाखंड: जहां विक्षिप्तों का शिकार कर पुलिस खुद को 'सिंघम' बताती है!
6/19/2026 5:51:43 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Patna •
यूपी का 'एनकाउंटर कल्चर' और बंगाल का 'बुलडोजर राज' क्या अब बिहार की नियति बनेगा?
•
एक सोशल मीडिया लाइव और सीधे मौत की सजा?
भोजपुर के भरत भूषण तिवारी की हत्या पर नीतीश-सम्राट सरकार की 'क्रूर' खामोशी की पूरी पोल-खोल। बिहार की नीतीश-सम्राट सरकार के राज में सुशासन का मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है। भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी नाम के एक युवक का जिस तरह तथाकथित एनकाउंटर किया गया, उसने साफ कर दिया है कि बिहार पुलिस अब कानून की रक्षक नहीं, बल्कि 'जल्लाद' की भूमिका में आ चुकी है। जिस लड़के को पुलिस खुद एक दिन पहले 'मानसिक रूप से विक्षिप्त' यानी बीमार बता रही थी, अगले ही दिन उसे गोलियों से भून दिया गया। यह कानून का राज है या खाकी की गुंडागर्दी?
आज बिहार का आम नागरिक डरा हुआ है, क्योंकि उसे समझ आ चुका है कि यहां की सरकार जनता को सुरक्षा देने में नहीं, बल्कि लाशों पर राजनीति करने में माहिर हो चुकी है।
•
यूपी का 'ठोक दो' और बंगाल का 'उखाड़ दो' मॉडल: बिहार में कानून का कत्ल
बिहार सरकार इन दिनों पड़ोसी राज्यों की सबसे खराब और अलोकतांत्रिक प्रथाओं की नकल करने की होड़ में लगी है।
1.
यूपी का एनकाउंटर मॉडल (अपराध नहीं, अपराधी को मिटाने का ढोंग):
उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी अब 'ऑन द स्पॉट' फैसले की सियासत शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री बड़े गर्व से मंचों से चिल्लाते हैं—"अपराधी या तो बिहार छोड़ें या श्मशान जाएं।" यह बयान पुलिस के लिए खुली छूट (फ्री हैंड) बन गया है। पुलिस अब अदालतों और संविधान को ताक पर रखकर खुद ही जज, जूरी और जल्लाद बन बैठी है। भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव पर पुलिस को चुनौती दी, जो कि गलत था, लेकिन क्या कानून में इसकी सजा सीधे एनकाउंटर है?
2.
बंगाल का बुलडोजर/हिंसा मॉडल:
जिस तरह पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोधियों और आम जनता की आवाज को सत्ता के बल पर कुचला जाता है, ठीक वही तानाशाही आज बिहार की सड़कों पर दिख रही है। जब पीड़ित परिवार और आम जनता ने इस फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ आरा-बक्सर फोरलेन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, तो सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बर्बरता से लाठियां चलवाईं।
•
बिहार वासियों का सीधा सवाल: इस तरह नहीं चल सकती सरकार!
नीतीश जी, बिहार की जनता ने आपको 'सुशासन बाबू' इसलिए नहीं बनाया था कि आपकी पुलिस मानसिक रूप से बीमार लोगों का शिकार करे।
•
बेगुनाहों की बलि कब तक?
भरत भूषण तिवारी के परिजनों और ग्रामीणों का साफ कहना है कि उसने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था। जब एक शख्स सरेंडर कर चुका था, तो उसे पैर में गोली मारने के बहाने मौत की नींद क्यों सुलाया गया? क्या पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के लिए बेगुनाहों का एनकाउंटर कर रही है?
•
सोशल मीडिया लाइव का जवाब सीधे मौत?
अगर सोशल मीडिया पर बड़बोलेपन या हथियार लहराने की सजा सीधे एनकाउंटर है, तो बिहार के उन सैंकड़ों रसूखदार और सत्ताधारी नेताओं के बेटों का एनकाउंटर कब होगा जो हर दिन शादियों में अवैध हथियारों से हर्ष फायरिंग करते हैं? या फिर कानून का यह डंडा सिर्फ गरीब और लाचार आम जनता के लिए ही आरक्षित है?
•
सत्तापक्ष के अपने ही नेताओं ने खोली पोल:
इस एनकाउंटर का खोखलापन इससे भी साबित होता है कि सरकार के अपने शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी और भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे तक को इस पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ बोलना पड़ा। अश्विनी चौबे ने तो इसे "लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला" बताया है। जब सरकार के अपने ही लोग पुलिस को हत्यारा मान रहे हैं, तो मुख्यमंत्री किस मुंह से सुशासन का दावा कर रहे हैं?
•
जनता का फैसला: एनकाउंटर की राजनीति बिहार बर्दाश्त नहीं करेगा
बिहार की मिट्टी ने हमेशा लोकतंत्र और न्याय की लड़ाई लड़ी है। यहां की जनता उत्तर प्रदेश या बंगाल के हिंसक मॉडलों को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी। 4 पुलिसकर्मियों (SHO संजीव कुमार समेत) को सस्पेंड करना केवल एक प्रशासनिक लीपापोती है, असली इंसाफ तब होगा जब इस 'फर्जी एनकाउंटर' की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होगी और दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलेगा।
नीतीश-सम्राट सरकार यह कान खोलकर सुन ले—"बंदूक की नोक पर और बेगुनाहों के खून से सने एनकाउंटर के दम पर बिहार की सत्ता नहीं चलाई जा सकती।" अगर आज जनता की आवाज को लाठियों से दबाया गया, तो आने वाले समय में यही जनता अपने वोटों की चोट से इस दमनकारी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट कोयलांचल लाइव पटना
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