झारखंड में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। फरार चल रहे बृजेश गंझू उर्फ भोला सिंह भोक्ता के बाद अब संगठन की कमान उसकी पत्नी और परिवार के सदस्यों के हाथों में होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि उसकी पत्नी जंगी ऐप और सेशन ऐप के जरिए संगठन का संचालन कर रही है। इस पूरे नेटवर्क को लेकर झारखंड ATS ने जांच तेज कर दी है। ATS उन परिजनों और संगठन के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है, जो जंगी ऐप का इस्तेमाल करने के साथ लेवी वसूली में कथित तौर पर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में IT एक्ट की धारा 69A के तहत जंगी ऐप को प्रतिबंधित किया था। इस ऐप के इस्तेमाल और इससे जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां अब लेवी के पैसों के लेन-देन और निवेश का हिसाब खंगाल रही हैं। परिवार के किन सदस्यों ने इन पैसों का इस्तेमाल किया और कहां-कहां निवेश किया गया, इसकी जांच झारखंड ATS के साथ उत्तर प्रदेश ATS भी करेगी। जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि लेवी की रकम परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बीच बांटी गई। इसके अलावा CCL में रिश्तेदारों और अन्य लोगों को नौकरी दिलाने तथा बिना ड्यूटी किए वेतन भुगतान होने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। ATS ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है, जिनकी हाजिरी दर्ज होने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने की आशंका है। वहीं, झारखंड और उत्तर प्रदेश ATS अग्रवाल नाम के एक कथित मध्यस्थ की भी तलाश कर रही है। आरोप है कि इसी मध्यस्थ के जरिए बृजेश गंझू की पत्नी तक लेवी की रकम पहुंचाई जाती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बृजेश गंझू के फरार रहने के दौरान उसके संपर्क में परिवार के कौन-कौन से सदस्य थे और संगठन के संचालन में किसकी क्या भूमिका थी। ATS सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच करते हुए गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।कोयलांचल लाइव डेस्क : झारखंड में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। फरार चल रहे बृजेश गंझू उर्फ भोला सिंह भोक्ता के बाद अब संगठन की कमान उसकी पत्नी और परिवार के सदस्यों के हाथों में होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि उसकी पत्नी जंगी ऐप और सेशन ऐप के जरिए संगठन का संचालन कर रही है। इस पूरे नेटवर्क को लेकर झारखंड ATS ने जांच तेज कर दी है। ATS उन परिजनों और संगठन के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है, जो जंगी ऐप का इस्तेमाल करने के साथ लेवी वसूली में कथित तौर पर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में IT एक्ट की धारा 69A के तहत जंगी ऐप को प्रतिबंधित किया था। इस ऐप के इस्तेमाल और इससे जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां अब लेवी के पैसों के लेन-देन और निवेश का हिसाब खंगाल रही हैं। परिवार के किन सदस्यों ने इन पैसों का इस्तेमाल किया और कहां-कहां निवेश किया गया, इसकी जांच झारखंड ATS के साथ उत्तर प्रदेश ATS भी करेगी। जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि लेवी की रकम परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बीच बांटी गई। इसके अलावा CCL में रिश्तेदारों और अन्य लोगों को नौकरी दिलाने तथा बिना ड्यूटी किए वेतन भुगतान होने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। ATS ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है, जिनकी हाजिरी दर्ज होने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने की आशंका है। वहीं, झारखंड और उत्तर प्रदेश ATS अग्रवाल नाम के एक कथित मध्यस्थ की भी तलाश कर रही है। आरोप है कि इसी मध्यस्थ के जरिए बृजेश गंझू की पत्नी तक लेवी की रकम पहुंचाई जाती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बृजेश गंझू के फरार रहने के दौरान उसके संपर्क में परिवार के कौन-कौन से सदस्य थे और संगठन के संचालन में किसकी क्या भूमिका थी। ATS सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच करते हुए गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
कोयलांचल लाइव डेस्क
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