Date: 30/07/2026 Thursday ABOUT US ADVERTISE WITH US Contact Us

 IIT ISM की बड़ी कामयाबी: स्लरी परिवहन की नई पाइपलाइन तकनीक को मिला भारतीय पेटेंट

7/30/2026 1:15:55 PM IST

12
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
धनबाद :- धनबाद के IIT (ISM) ने शोध के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने स्लरी और द्रव परिवहन के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजते हुए 'फोर लोब्ड स्वर्ल इंड्यूसिंग पाइप' तकनीक विकसित की है। चार वर्षों के शोध के बाद इस तकनीक को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल गया है। यह तकनीक कोयला, तेल एवं गैस, रासायनिक उद्योगों और पावर प्लांट सहित कई क्षेत्रों में पाइपलाइन की कार्यक्षमता बढ़ाने और ऊर्जा बचाने में अहम भूमिका निभाएगी। IIT ISM के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अजीत कुमार, डॉ. पंकज कुमार गुप्ता, डॉ. राम कृष्ण राठौर और डॉ. निरंजन कुमार की टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है शोधकर्ताओं के अनुसार, लंबे समय से पाइपलाइन के जरिए स्लरी और द्रव परिवहन के दौरान ठोस कणों के जमाव, अधिक दबाव हानि और ऊर्जा की खपत जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। नई तकनीक में पाइप के भीतर द्रव नियंत्रित तरीके से घूमता है, जिससे कण समान रूप से वितरित रहते हैं, बेहतर मिश्रण होता है और उपयुक्त परिस्थितियों में दबाव हानि भी कम हो सकती है। इससे ऊर्जा की बचत के साथ पाइपलाइन प्रणाली की दक्षता भी बढ़ेगी। इस तकनीक के पेटेंट के लिए वर्ष 2022 में आवेदन किया गया था। लगभग चार वर्षों तक तकनीकी परीक्षण और समीक्षा के बाद 27 जुलाई 2026 को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत इसे स्वीकृति प्रदान कर दी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस पेटेंट से उद्योगों के साथ तकनीकी सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यवसायीकरण की नई संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही यह नवाचार औद्योगिक उत्पादकता बढ़ाने, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक प्रक्रियाओं को भी बढ़ावा देगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक लौह अयस्क एवं खनिज स्लरी परिवहन, खनन एवं बेनिफिशिएशन उद्योग, तेल एवं गैस पाइपलाइन, रासायनिक संयंत्र, ताप विद्युत परियोजनाओं, जल आपूर्ति, अपशिष्ट जल शोधन, हीट एक्सचेंजर, मिक्सिंग सिस्टम और पर्यावरण अभियांत्रिकी जैसे कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगी। IIT ISM की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के शोध कौशल को नई पहचान दिलाएगी, बल्कि भारतीय उद्योगों के लिए भी तकनीकी रूप से एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
 
कोयलांचल लाइव डेस्क