Jamshedpur : पोटका प्रखंड अंतर्गत जुड़ी मौजा, हाता स्थित स्वाति उद्योग प्राइवेट लिमिटेड सीमेंट प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2006 में लगभग 80 ग्रामीण रैयतदारों ने अपनी बहुमूल्य कृषि योग्य जमीन कंपनी को इस उम्मीद और विश्वास के साथ दी थी कि कंपनी के संचालन से उन्हें स्थायी रोजगार, आर्थिक सुरक्षा तथा उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित होगा। जमीनदाताओं के अनुसार, कंपनी प्रबंधन द्वारा उनके साथ रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर लिखित एकरारनामा भी किया गया था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि वर्ष 2017 से कंपनी बंद पड़ी है। इसके कारण जमीन देने वाले अनेक परिवार रोजगार से वंचित हो गए हैं। जिन परिवारों ने अपनी पुश्तैनी कृषि भूमि कंपनी को दी थी, वे आज भी अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अब इस बंद पडे सीमेंट प्लांट को किसी अन्य कंपनी अथवा निवेशक द्वारा खरीदने अधिग्रहण करने, हस्तांतरित करने या पुनः चालू करने की चर्चा सामने आ रही है। ऐसी स्थिति मे हमारी मांग है कि किसी भी कंपनी द्वारा प्लांट का टेकओवर, स्वामित्व हस्तांतरण अथवा औद्योगिक गतिविधियां पुनः शुरू करने से पहले वर्ष 2006 मे जमीन देने वाले सभी प्रभावित रयतदारों को विश्वास में लिया जाए तथा उनके साथ जिला प्रशासन की उपस्थिति मे औपचारिक वार्ता कर उनके लंबित हक- अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। जमीन रैयतदारों ने कहा कि पुराने एकरारनामें का पालन: वर्ष 2006 मे जमीनदाताओं और कंपनी प्रबंधन के बीच हुए सभी मूल समझौतों एवं एकरारनामो की जांच कर उनकी शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, रोजगार का अधिकार जिन जमीनदाता परिवारों को अब तक समझौते के अनुसार रोजगार नही मिला है, उन्हें प्राथमिकता दिया जाय, लंबित आर्थिक लाभ: पुराने समझौते के अनुसार जिन जमीनदाताओं का कोई मुआवजा, आर्थिक लाभ अथवा अन्य देय राशि लंबित है, उसका निष्पक्ष आकलन कर भुगतान कराया जाए।, नई कंपनी पराने जमीनदाता परिवारों एवं जिला प्रशासन की उपस्थिति में त्रिपक्षीय समझौता कराया जाए ताकि भविष्य में ग्रामीणो के अधिकारों का उल्लंघन न हो, कंपनी में स्थायी एवं अस्थायी रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण, ठेका कार्य, परिवहन तथा अन्य व्यावसायिक अवसरों में स्थान मिले आदि मांग हैं।
जमशेदपुर से कोयलांचल लाइव के लिए बिनोद केसरी की रिपोर्ट
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